ओडिशा इस समय हाल के सालों की सबसे गंभीर बाढ़ की स्थिति से जूझ रहा है। कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण गांवों, खेतों और निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई जगहों पर सड़क संपर्क टूट गया है और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कुछ प्रभावित इलाकों में बारिश को करीब 25 सालों में सबसे भारी बताया गया है। ऐसे में सीएम मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों की राहत के लिए 1000 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया है।

ओडिशा सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और सैकड़ों राहत शिविर बनाए गए हैं। अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने और प्रभावित परिवारों तक भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के शुरुआती आकलन के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित जिलों में करीब 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति 74 ब्लॉक और 1,361 गांवों तक पहुंची है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 3 लाख लोगों को बचाया या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव अभियान के लिए लगभग 45 ओड्राफ टीम, 8 एनडीआरएफ टीम और 59 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीम तैनात की गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में करीब 550 राहत शिविर खोले गए हैं। सरकार का कहना है कि निचले इलाकों और पानी से घिरे गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
जाजपुर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। यहां करीब 77,680 लोगों को बचाया या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में प्रभावित लोगों के लिए 203 राहत शिविर बनाए गए हैं। बचाव अभियान में 9 ओड्राफ टीम, 2 एनडीआरएफ टीम और 12 फायर एंड इमरजेंसी सर्विस टीम काम कर रही हैं। अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भद्रक जिले में भी बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिला है। जिले के 4 ब्लॉक और एक नगरपालिका क्षेत्र के 149 गांव प्रभावित हुए हैं। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 2.59 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि लगभग 1.96 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भद्रक में करीब 90 राहत शिविर खोले गए हैं। बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए 15 ओड्राफ टीम तैनात की गई हैं। तिहिड़ी ब्लॉक के श्यामसुंदरपुर और ईश्वरपुर जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों का अधिकारियों और बचाव दलों ने दौरा किया है। राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लेने के साथ-साथ संवेदनशील सरकारी इमारतों और स्कूलों की भी जांच की जा रही है।
1000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा
सरकार ने साफ किया है कि यह राशि शुरुआती आकलन के आधार पर है। पानी उतरने के बाद जब नुकसान का विस्तृत आकलन होगा, तब जरूरत पड़ने पर राहत राशि बढ़ाई जा सकती है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने कुल 1,000 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज का उद्देश्य सिर्फ तत्काल राहत देना नहीं है, बल्कि बाढ़ के कारण प्रभावित हुई लोगों की आजीविका को दोबारा खड़ा करने में मदद करना भी है। इसमें खेती को हुए नुकसान, पशुधन, मछली पालन, घरेलू सामान और रोजी-रोटी से जुड़े जरूरी संसाधनों को हुए नुकसान को शामिल किया गया है।
बढ़ाया जा सकता है पैकेज
सरकार ने कहा है कि अभी घोषित राहत पैकेज शुरुआती आकलन पर आधारित है। जब बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर जाएगा, तब जिला प्रशासन की टीमें गांवों में जाकर नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगी। इस दौरान मकानों, फसलों, पशुधन, मछली पालन, सड़कों और दूसरी संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जाएगी। जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य स्तर पर नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर जरूरत पड़ने पर राहत और पुनर्वास पैकेज को और बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि मौजूदा राहत पैकेज अंतिम सीमा नहीं है। पानी उतरने के बाद सामने आने वाले वास्तविक नुकसान के आधार पर प्रभावित लोगों के लिए अतिरिक्त सहायता पर भी फैसला लिया जा सकता है।
मेडिकल टीमों को सतर्क रहने के निर्देश
बाढ़ के बीच स्वास्थ्य विभाग को भी पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। पानी जमा रहने के कारण पानी से होने वाली बीमारियों, संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। राहत शिविरों में भी स्वास्थ्य निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। बाढ़ के दौरान सांप और दूसरे जीव सुरक्षित जगह की तलाश में आबादी वाले इलाकों में पहुंच सकते हैं। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-वेनम इंजेक्शन और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।












