📍 स्थान: शंकरालय मंदिर, मुकुंद नगर, गेट के पास, मुंबई – 400089
📅 तारीख: 6 जुलाई 2025 | पावन अवसर: आषाढ़ी एकादशी
🙏🏼 “भक्ति तब पूर्ण होती है जब वह सेवा में परिवर्तित हो जाए…”
मनराज प्रतिष्ठान ने इस दिव्य विचार को साकार करते हुए आषाढ़ी एकादशी के पावन दिन पर 411वां निःशुल्क आरोग्य शिविर का आयोजन किया। यह शिविर VBA के सहयोग और मयूर रामचंद्र अठावले के सक्रिय समर्थन से शंकरालय मंदिर, मुकुंद नगर परिसर में आयोजित हुआ।

आषाढ़ी एकादशी – एक ऐसा दिन जब संपूर्ण महाराष्ट्र में वारकरी संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर के भजनों के साथ भगवान विठोबा की भक्ति में मग्न होता है, उसी दिन मनराज प्रतिष्ठान ने भक्ति का एक नया रूप प्रस्तुत किया – सेवा के माध्यम से परमात्मा की आराधना।
🩺 आरोग्य शिविर की मुख्य विशेषताएं:
👥 कुल लाभार्थी: 213 रोगी
💉 शुगर व थायरॉइड जाँच: 37
🌬️ अस्थमा जाँच: 42
👓 मोफत चश्मों का वितरण: 68 वरिष्ठ नागरिकों को
💠 पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध सेवाएँ:
बी.पी. जाँच
शुगर और थायरॉइड टेस्ट
नेत्र जाँच
मोफत चश्मे( वरिष्ठ नागरिक)
अस्थमा जाँच
निशुल्क औषधियाँ
🙌 शिविर के सफल संचालन में योगदान देनेवाले सेवा योद्धा:
डॉ. शिवानी यादव – संपूर्ण चिकित्सा परीक्षण और परामर्श में निपुणता के साथ उपस्थित रहीं।
अनिल अंगालदिवटे – ज़मीनी स्तर पर समन्वय और मजदूर व जरूरतमंद समुदाय से संपर्क स्थापित करने का कार्य।
विध्या यादव – रोगियों के पंजीकरण व शिबिर की व्यवस्था में पूर्ण सहयोग।
हर्केश पांडे – नेत्र परीक्षण और चश्मे वितरण में सक्रिय भूमिका।
🕉️ सेवा में समर्पित श्रद्धा का संदेश:
मनराज प्रतिष्ठान के संस्थापक श्री मनोज राजन नथानी का यह मानना है कि—
“भगवान तक पहुँचने का सबसे सुंदर मार्ग मानवता की सेवा है। मंदिरों में भक्ति गूंजे, पर दिलों में सेवा जागे – यही सच्चा धर्म है।”
इस शिविर के माध्यम से उन्होंने भक्ति को कर्म से जोड़ा। जहाँ एक ओर लोग भजन-कीर्तन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर इस शिविर में ज़रूरतमंदों को दवा, चश्मे और देखभाल मिल रही थी।
✨ निष्कर्ष:
यह निःशुल्क आरोग्य शिविर सिर्फ एक सेवा आयोजन नहीं था — यह भक्ति, करुणा और कर्तव्यबोध का जीवंत उदाहरण था।
🙏 “जहाँ ज़रूरत, वहाँ मनराज प्रतिष्ठान”, यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक संकल्प है जिसे हर सप्ताह, हर गली, हर मंदिर और हर पीड़ित मनुष्य के पास पहुँचाकर मनोज नथानी और उनकी टीम निभा रहे हैं।
💖 यह शिविर नहीं, श्रद्धा और सेवा का सच्चा संगम था।













