कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पूछताछ कर रही है. कांग्रेस नेता से ये पूछताछ नेशनल हेराल्ड मामले में की जा रही है. बताया जा रहा है कि, ईडी ने खड़गे को समन भेजकर सोमवार को तलब किया था. वो करीब 11 बजे प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंचे, इसके बाद से उनसे पूछताछ जारी है.
इस केस में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आरोपी हैं. नेशनल हेराल्ड केस में प्रर्वतन निदेशालय कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रहा है. यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने कांग्रेस पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण में धोखाधड़ी, साजिश और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया है. इसी मामले में मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ की जा रही है, क्योंकि वह यंग इंडिया और एजीएल के पदाधिकारी रह चुके हैं.
नेशनल हेराल्ड है क्या?
नेशनल हेराल्ड 1938 में शुरू किया गया एक अखबार था. पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका इस्तेमाल आजादी की लड़ाई में किया. पंडित नेहरू ने 1937 में असोसिएटेड जर्नल बनाया था, जिसने तीन अखबार निकालने शुरू किए. हिंदी में नवजीवन, उर्दू में कौमी आवाज और अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड. 2008 आते-आते असोसिएटेड जर्नल ने फैसला किया कि अब अखबार नहीं छापे जाएंगे. बाद में पता चला कि असोसिएटेड जर्नल पर 90 करोड़ रुपयों का कर्ज भी चढ़ चुका है.
कोर्ट तक पहुंचा मामला
सारा मामला 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाया था. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में एक जनहित याचिका फाइल की. उन्होंने कांग्रेस पर नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के अधिग्रहण में धोखाधड़ी का आरोप लगाया. सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी जनहित याचिका में अदालत से कहा कि मात्र 50 लाख रुपये खर्च करके 90 करोड़ रुपयों की वसूली कर ली गई.
इनकम टैक्स एक्ट के हिसाब से कोई भी राजनीतिक पार्टी किसी थर्ड पार्टी के साथ पैसों का लेन-देन नहीं कर सकती. स्वामी ने कोर्ट से कहा कि कांग्रेस ने पहले यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 90 करोड़ का लोन दिया, जिस पैसे से इस कंपनी एजेएल का अधिग्रहण किया, फिर अकाउंट बुक्स में हेर-फेर करके उस रकम को 50 लाख दिखा दिया. यानी 89 करोड़ 50 लाख रुपये माफ कर दिए गए.
सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में आरोप लगाया कि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड ने अखबार छापना बंद करके प्रॉपर्टी का काम शुरू कर दिया. यानी वह एक रियल एस्टेट फर्म बन गई, जो दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में बिजनेस कर रही थी.
स्वामी का आरोप है कि एजेएस की जितनी भी संपत्तियां थीं, वे सभी कांग्रेस नेताओं ने अपने नाम करा लीं. क्योंकि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड खरीद चुकी थी, जो राहुल गांधी और सोनिया गांधी की कंपनी थी. अनुमान के मुताबिक एजेएस की संपत्तियों की कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये थी. सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि 90 करोड़ खर्च करके 2000 करोड़ की प्रॉपर्टी कांग्रेस ने खड़ी कर दी.
इस मामले में कांग्रेस का क्या है कहना?
कांग्रेस कहती है कि यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को चैरिटी यानी दान-पुण्य के लिए बनाया गया था. उनके मुताबिक पैसों का जो लेन-देन हुआ है, वह फाइनेंशियल नहीं, बल्कि कॉमर्शियल था. यानी वित्तीय नहीं, बल्कि व्यावसायिक था. तब से ही यह मामला अदालत में चल रहा है.
बता दें कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं. नेशनल हेराल्ड और नवजीवन का अब प्रिंट एडिशन तो नहीं छपता, लेकिन दोनों का डिजिटल एडिशन यानी वेबसाइट उपलब्ध हैं.













