दिल्ली की सियासत में शुक्रवार को उस वक्त एक बार फिर सियासी बवंडर उठ खड़ा हुआ, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अचानक संसद मार्ग थाने पहुंच गए. उनके साथ 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन से गंभीर रूप से घायल हुआ 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब भी था. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ करीब छह घंटे तक थाने के बाहर चले हाई-वोल्टेज धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज ली है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक ने खास बातचीत में इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान आखिर किस व्यक्ति या नियम के आदेश पर छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया और पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ. वासनिक ने आरोप लगाया कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन इस बात का कोई ठोस जवाब देने से बच रहा है कि छात्रों को निशाना क्यों बनाया गया?
मुकुल वासनिक ने पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि यह छात्रों और विपक्ष के लगातार दबाव का परिणाम था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पद छोड़ने के बावजूद संसद भवन में जिस तरह से उनका स्वागत किया गया, उसे पूरे देश की जनता ने देखा है. वासनिक ने दो टूक कहा कि एक मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस का यह नैतिक दायित्व है कि वह देश के युवाओं और पीड़ितों के अधिकारों के लिए सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाए.
दिल्ली के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश के कानून के मुताबिक कोई भी नागरिक कहीं से भी जीरो एफआईआर दर्ज करा सकता है, लेकिन गंभीर रूप से घायलों और पीड़ितों के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करना सीधे तौर पर सरकार की संदेहास्पद मंशा को दर्शाता है. यादव ने आक्रामक रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सत्ता और पुलिस प्रशासन हर स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने और तानाशाही थोपने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे कांग्रेस पार्टी कभी सफल नहीं होने देगी.
देवेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि जब तक देश के छात्रों, नौजवानों और किसानों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष किसी भी कीमत पर रुकेगा नहीं. उन्होंने दोहराया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का हर एक सिपाही इस अन्याय के खिलाफ मजबूती के साथ डटा रहेगा. उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.
राहुल गांधी पैलेट गन से जख्मी युवा साहिल के साथ अचानक शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे संसद मार्ग थाने पहुंचे और उन्होंने डीसीपी व अन्य पुलिस वालों से मुलाकात कर साहिल को लगी छर्रे के मामले में एफआईआर दर्ज करने की बात कही. राहुल गांधी के सांसद मार्ग पहुंचने की सूचना पाते ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, अधीर रंजन, मुकुल वासनिक से लेकर दिल्ली में मौजूद अन्य राज्यों के कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए और उनकी मांग का समर्थन करने लगे.
आखिरकार संसद मार्ग थाने में करीब छह घंटे तक चले इस कड़े राजनीतिक गतिरोध और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद, यह साफ हो गया है कि कांग्रेस अब छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने के मूड में नहीं है. जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद सहित विपक्ष के तमाम दिग्गजों की मौजूदगी ने यह संदेश दे दिया है कि आने वाले दिनों में यह पैलेट गन विवाद सड़क से लेकर संसद तक गूंजेगा.












