नई दिल्ली, 06 फ़रवरी । राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना किसी रुकावट और किफायती यात्रा के लिए शुरू किया गया फास्टैग वार्षिक पास अपने शुभारंभ के मात्र छह माह के भीतर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 50 लाख से अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंच गया है। पिछले साल 15 अगस्त को प्रारंभ की गई इस योजना के तहत अब तक 26 करोड़ 55 लाख से अधिक टोल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर कुल कार लेन-देन में से लगभग 28 प्रतिशत लेन-देन फास्टैग वार्षिक पास के माध्यम से हो रहे हैं, जिससे निजी वाहन चालकों के बीच इसकी बढ़ती स्वीकार्यता स्पष्ट होती है।
मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बिजवासन शुल्क प्लाजा वार्षिक पास उपयोग के मामले में अग्रणी रहा, जहां कुल कार आवागमन का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा इसी पास के जरिए दर्ज किया गया। इसके बाद मुंडका शुल्क प्लाजा (दिल्ली-एनसीआर) और झिंझोली शुल्क प्लाजा (सोनीपत) रहे, जहां करीब 53 प्रतिशत गैर-व्यावसायिक वाहन वार्षिक पास का उपयोग करते पाए गए।
इसके अलावा क्षेत्रवार विश्लेषण में चंडीगढ़ शीर्ष स्थान पर रहा, जहां देशभर में दर्ज कुल वार्षिक पास लेन-देन का 14 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया। इसके बाद तमिलनाडु (12.3 प्रतिशत) और दिल्ली (11.5 प्रतिशत) का स्थान रहा। यह आंकड़े उत्तर से दक्षिण तक योजना की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाते हैं।
उल्लेखनीय है कि यह वार्षिक पास देशभर के लगभग 1,150 शुल्क प्लाजा, जो राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर स्थित हैं, पर लागू है। मात्र 3,000 रुपये के एकमुश्त भुगतान पर यह पास एक वर्ष अथवा 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग तक वैध रहता है। यह सुविधा वैध फास्टैग लगे सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है।












