यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां अलग-अलग शहरों में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए एअर इंडिया की 2 फ्लाइट आज रात रवाना होंगी। इसका खर्च भारत सरकार उठाएगी। ये बुखारेस्ट, रोमानिया के रास्ते भारतीयों को वापस लाएंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जो भारतीय नागरिक सड़क मार्ग के जरिए यूक्रेन और रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गए हैं उन्हें यूक्रेन में स्थित भारतीय अधिकारी बुखारेस्ट, रोमानिया ले जाएंगे। यहां से उड़ानों के जरिए यूक्रेन में फंसे हुए लोग भारत लौटेंगे। सरकार ने कहा है कि इन फ्लाइट्स का खर्चा भारत सरकार उठाएगी।
सड़क मार्ग से तय करना होगी यूक्रेन-रोमानियाई का रास्ता
यूक्रेन की राजधानी कीव और रोमानियाई सीमा के बीच की दूरी लगभग 600 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में करीब 8.5 से 11 घंटों तक का वक्त लगता है। वहीं यूक्रेन-रोमानिया सीमा से बुखारेस्ट तक की दूरी करीब 500 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में करीब सात से नौ घंटे का वक्त लगता है।
दूतावास ने जारी की एडवाइजरी
यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित इंडियन एंबेसी ने भारतीय नागरिकों से कहा है कि वह यात्रा करते वक्त एंबेसी के संपर्क में रहें और यात्रा के दौरान पासपोर्ट, किसी भी इमरजेंसी के लिए अमेरिकी डॉलर में कैश और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स और सामान अपने साथ रखें। एंबेसी ने कहा है कि अगर कोविड वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट हो तो उसे भी अपने साथ रखें। यह भी कहा गया है कि यात्रा के दौरान आप जिस भी गाड़ी से यात्रा कर रहें हो तो उस पर भारत का झंडा भी लगाएं।
बता दें कि यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारत के मेडिकल स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। यूक्रेन में करीब 20 हजार भारतीय रहते हैं हालंकि इनमें से कुछ लोग रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से पहले ही यूक्रेन छोड़ चुके थे। लेकिन एयरस्पेस बंद हो जाने के कारण कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं। एयरस्पेस बंद हो जाने के कारण एयर इंडिया के एक विमान को वापस लौटना पड़ा था। तो ऐसे में सरकार के इस कदम से लोग सुरक्षित भारत लौट सकेंगे।
इससे पहले गुरुवार की रात भारतीय छात्र मेट्रो स्टेशन, हॉस्टलों के बंकरों और अपने फ्लैट्स में छिपे रहे। यहां सुरक्षा में तैनात मार्शल उनके मोबाइल से यूक्रेन पर हमले से संबंधित फोटो और वीडियो डिलीट करा रहे थे। बंकर में छिपे छात्र हनुमान चालीसा का पाठ करते भी नजर आए। छात्रों का कहना है कि भारतीय एम्बेसी अगर क्लासेज ऑनलाइन चलवाने की मांग मान लेती तो वह फंसते नहीं।













